छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ दो आदिवासी धर्म से जुड़े व्यक्तियों ने एक पादरी और उनके परिवार पर उनके ईसाई विश्वास के कारण क्रूर हमला किया। इस हमले का उद्देश्य उन्हें उनके घर और ज़मीन से भगाना था।
यह घटना सुकमा ज़िले के कोर्रा ग्राम पंचायत के अंतर्गत गादीरास थाना क्षेत्र के एक गाँव में हुई। पादरी मोटू सोड़ी के अनुसार, हमलावर एक भीड़ के साथ उनके घर पहुँचे, जहाँ उनका चर्च भी संचालित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पादरी ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर उनके पारंपरिक धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित कर रहे हैं।
हालाँकि, भीड़ के साथ आने के बावजूद केवल दो व्यक्तियों ने ही हमला किया। पादरी सोड़ी ने बताया,
“वे मुझे पकड़कर रखे और दूसरे ने मोटी लकड़ियों से बेरहमी से पीटा।”
परिवार पर क्रूर हमला:-
इस हमले में पादरी की पत्नी, बहन और भांजी भी बुरी तरह घायल हो गईं।
पादरी की पत्नी के सिर में गंभीर चोट आई और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।
“वह पूरी तरह खून से लथपथ हो गई थीं,” पादरी ने कहा।
उनकी बहन के कान में गंभीर चोट आई, जिससे उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई।
उनकी 18 वर्षीय भांजी, मंगली मड़ावी, के चेहरे पर टूटे हुए डंडे के नुकीले हिस्से से गहरा घाव हुआ।
दोबारा हमला और झूठा मामला:-
13 अप्रैल को पहली बार हमला करने के बाद, हमलावरों ने पुलिस में पादरी के खिलाफ जबरन धर्मांतरण का झूठा आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। अगले ही दिन, 14 अप्रैल को वे फिर लौटे और परिवार पर दोबारा हमला किया।
पादरी सोड़ी ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने इसे “ज़मीन विवाद से जुड़ा झगड़ा” बताकर दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
पादरी ने कहा,
“हमने स्पष्ट कहा कि यह हमारे विश्वास के कारण हमला है, ज़मीन का कोई विवाद नहीं है, लेकिन पुलिस ने हमारी बात नहीं सुनी।”
चिकित्सा में लापरवाही:
हमले के बाद पादरी की पत्नी को तुरंत चिकित्सा सहायता नहीं मिली। 16 अप्रैल को पादरी द्वारा सवाल उठाने के बाद ही पुलिस ने एक महिला कांस्टेबल के साथ उन्हें अस्पताल भेजा।
“अत्यधिक खून बहने के कारण वह बहुत कमजोर हो गई हैं,” उन्होंने बताया।
लगातार खतरा और तनाव:
घटना के बाद गाँव का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पादरी ने बताया कि 15 अप्रैल की रात कुछ लोग उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा,
“मैं न्याय चाहता हूँ। मैं अपना घर नहीं छोड़ूँगा और न ही अपने विश्वास से पीछे हटूँगा।”
पृष्ठभूमि:-
पादरी मोटू सोड़ी पिछले 15 वर्षों से ईसाई विश्वास में हैं और 10 वर्षों से अपने घर में चर्च चला रहे हैं। उनके चर्च में लगभग 7 परिवारों के 25 लोग आते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से गाँव में ईसाई परिवारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
2025 में दो परिवारों पर हमला हुआ
2023 में भी एक परिवार को निशाना बनाया गया
निष्कर्ष:-
यह घटना न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रश्न खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदायों को किस प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ रहा है।