पिछले महीने छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार की गई केरल की दो ननों ने शनिवार 16 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की। असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट (एएसएमआई) से जुड़ी सिस्टर प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के साथ उनके रिश्तेदार भी थे।
मुलाकात के बाद एक रिश्तेदार ने मीडिया को बताया, “हमने राजीव जी के साथ मामले को लेकर अपनी चिंताएँ साझा कीं । हमने हस्तक्षेप करने और हमारी मदद करने के लिए उनका धन्यवाद भी किया। हमें उम्मीद है कि मामला खारिज हो जाएगा।”
चंद्रशेखर ने बाद में एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा, “सिस्टर प्रीति मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस आज दिल्ली में मुझसे मिलने आईं। उन्होंने भाजपा द्वारा किए गए हस्तक्षेप, जिसमें उनकी ज़मानत भी शामिल है, पर अपनी खुशी ज़ाहिर की।”
ये गिरफ्तारियां केरल में भाजपा के लिए एक बड़ा झटका हैं, जहां पार्टी सीरो-मालाबार कैथोलिक समुदाय तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दोनों ननों को सुखमन मंडावी के साथ 26 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिया गया था, जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन पर एक आदिवासी सहित तीन युवतियों की तस्करी और धर्म परिवर्तन का प्रयास करने का आरोप लगाया था। तीनों को दुर्ग सेंट्रल जेल में रखा गया था, जिसके बाद 2 अगस्त को बिलासपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एक विशेष अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी।
इस घटना के बाद केरल, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। ज़मानत प्रक्रिया का विरोध करते बजरंग दल कार्यकर्ताओं के वीडियो वायरल होने के साथ ही, देश भर में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए।
गिरफ्तारियों के बाद, जब विरोध प्रदर्शन अपने चरम पर पहुंच गया, तो राजीव चंद्रशेखर ने 1 अगस्त को आर्चडायोसिस मुख्यालय में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और त्रिशूर के आर्कबिशप एंड्रयूज थजाथ के साथ एक बंद कमरे में बैठक की। चर्चा के बाद, आर्कबिशप थजाथ ने मीडिया को बताया कि चंद्रशेखर ने पूर्ण समर्थन का वादा किया है और प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासनों को साझा किया है।
मीडिया और चर्च के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर ने पुष्टि की थी कि उन्होंने इस मामले पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पहले ही चर्चा कर ली है, जिन्होंने आश्वासन दिया है कि गिरफ्तार ननों की जमानत प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी।
2 अगस्त को, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने इस शर्त पर उनकी रिहाई का आदेश दिया कि वे अपने पासपोर्ट जमा करें, 50-50 हज़ार रुपये का निजी मुचलका भरें और दो ज़मानतदार पेश करें। अदालत का यह फ़ैसला सरकारी वकील की आपत्तियों के बावजूद आया, जिसमें उन्होंने जाँच के शुरुआती चरण का हवाला दिया था।