केरल: मार थोमा चर्च के वरिष्ठ पादरी और ट्रस्टी रेव. डॉ. के. थॉमस की एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। उन्होंने चर्च में होने वाले विवाहों से पहले दूल्हा-दुल्हन का HIV परीक्षण अनिवार्य किए जाने का सुझाव दिया है।
हाल ही में चर्च द्वारा आयोजित एक पारिवारिक सम्मेलन में अभिभावकों को संबोधित करते हुए पादरी डॉ. थॉमस ने विवाह से पहले स्वास्थ्य संबंधी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके संबोधन का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया और कुछ टीवी चैनलों पर चर्चा का विषय बन गया।
पादरी ने कहा कि उनकी इच्छा है कि मार थोमा चर्च में संपन्न होने वाले सभी विवाह आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षणों के बाद ही आयोजित किए जाएं। उन्होंने अभिभावकों से इस सुझाव को व्यक्तिगत रूप से न लेने की अपील भी की।
अपने संबोधन में उन्होंने कथित तौर पर कर्नाटक सरकार द्वारा कॉलेज परिसरों में HIV परीक्षण कराए जाने के निर्णय का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की स्वास्थ्य जांच की जा सकती है, तो चर्च में विवाह से पहले भी ऐसी जांच पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने अभिभावकों से यह भी आग्रह किया कि विवाह के लिए अपनी बेटियों को चर्च लाते समय वे उनकी सुरक्षा और शारीरिक गरिमा को लेकर सतर्क रहें। हालांकि, उनकी इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की भाषा युवाओं, विशेषकर चर्च से जुड़े युवाओं, के प्रति अपमानजनक या अनुचित धारणा पैदा कर सकती है।
वहीं, पादरी के वक्तव्य के पीछे स्वास्थ्य जागरूकता और विवाह से पहले आवश्यक सावधानियों पर जोर देने की बात भी सामने आती है। इस पूरे मुद्दे ने विवाह, स्वास्थ्य जांच, व्यक्तिगत गरिमा और धार्मिक संस्थानों की भूमिका को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है।
बताया गया है कि कार्यक्रम के दौरान दिए गए पादरी के भाषण का वीडियो गुरुवार को कुछ टीवी चैनलों पर प्रसारित होने के बाद यह मामला व्यापक चर्चा में आया।