तुर्की ने एक और ऐतिहासिक ईसाई चर्च को मस्जिद में बदलने की योजना बनाई है, जिससे दुनिया भर के ईसाई और राजनीतिक नेताओं में आक्रोश फैल गया है। अंकारा ने 1010 ईस्वी में निर्मित प्राचीन अर्मेनियाई कैथेड्रल ऑफ अनी को मस्जिद में बदलने का फैसला किया है, जो अर्मेनियाई ईसाई विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
इस निर्णय की व्यापक आलोचना हो रही है, क्योंकि यह क्षेत्र की अर्मेनियाई ईसाई विरासत को मिटाने का प्रयास लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सांस्कृतिक विरासत को राजनीतिकरण करने और ऐतिहासिक वास्तुकला को विकृत करने जैसा है।
विरोध के मुख्य बिंदु:
– सांस्कृतिक विरासत का राजनीतिकरण:
यह निर्णय सांस्कृतिक विरासत को राजनीतिकरण करने और ऐतिहासिक वास्तुकला को विकृत करने जैसा है।
– अर्मेनियाई पहचान का मिटाना:
तुर्की सरकार पर अर्मेनियाई पहचान और संस्कृति को मिटाने का आरोप लगाया जा रहा है।
– अंतर्राष्ट्रीय दबाव:
दुनिया भर के नेताओं और संगठनों से इस निर्णय की निंदा करने और इसे रोकने का आग्रह किया जा रहा है।
इस मुद्दे पर तुर्की सरकार के प्रवक्ता ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय तुर्की की सांस्कृतिक और धार्मिक नीतियों का हिस्सा है।