चेन्नई: जातीय और धार्मिक कार्यक्रमों में छात्रों को जबरन शामिल नहीं करना चाहिए — मद्रास हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे किसी धार्मिक या जातीय कार्यक्रम के लिए कॉलेज में छुट्टी घोषित की गई हो, फिर भी छात्रों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसमें भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि किसी कार्यक्रम में भाग लेना या न लेना छात्रों का व्यक्तिगत अधिकार है और इस पर दबाव डालना उचित नहीं है। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि छात्र ऐसे कार्यक्रमों में मजबूरी में भाग ले रहे हैं, तो तमिलनाडु सरकार को उस कॉलेज को दी जाने वाली सहायता रद्द करने जैसी कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना चाहिए।