तेहरान: ब्रिटेन स्थित एनजीओ आर्टिकल 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खुफिया मंत्रालय ने इजरायल के साथ युद्धविराम के बाद से दो हफ्तों में तेहरान, रश्त और उर्मिया सहित विभिन्न शहरों में कम से कम 21 ईसाइयों को गिरफ्तार किया है। ऐसी भी खबरें हैं कि और गिरफ्तारियां हो सकती हैं जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आर्टिकल 18 की रिपोर्ट है कि यह कार्रवाई जातीय और धार्मिक रूप से निराधार आरोपों पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।
ऐसी भी खबरें हैं कि कुछ ईसाइयों को बाइबिल रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ माई सातो और नाज़िला घनिया ने ईरान के कार्यों की आलोचना की। प्रतिनिधियों ने कहा कि संघर्ष के बाद के दमन का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने ईरानी मीडिया में इस्तेमाल किए गए अमानवीय विशेषणों की भी निंदा की, जिसमें अल्पसंख्यकों को “देशद्रोही” और अन्य अपमानजनक शब्द कहे गए हैं।
इस बीच इजरायली हमले के दौरान कम से कम 11 ईसाइयों को एविन जेल में हिरासत में लिया गया और बाद में स्थानांतरित कर दिया गया। इस्लाम से ईसाई धर्म अपनाने वाली आइदा नजफ्लो सहित कई अन्य लोग खारचक जेल में बंद हैं। आइदा वहाँ मौजूद अमानवीय परिस्थितियों की मुखर आलोचक रही हैं। ओपन डोर्स की उन देशों की सूची में ईरान नौवें स्थान पर है जहाँ ईसाई सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं