गाऊंगा में तेरे ही गीत, हे येशु तू है महान तेरा ही नाम मेरे मसीह, लेता हूँ सुबह और शाम…2. जब मै गुनाहों में पड़ा , तेरे प्रेम से मै दुर था, तेरे सन्मुख आने के लायक, मै कदिाप योग्य न था पर तू ही मेरा सहारा बना, अपने पास बुलाया, इसिलए मसीहा होठों से अपने स्तुित तेरी करूंगा। तेरी अनुग्रह तेरी दया को, कैसे भुलू मै मसीह, मेरे श्राप को तूने हटाकर, खुद श्रिीपत बना मसीह….2. तूने क्रूस पर लहू बहाकर, मुझे पापों से श्शुद्ध किया, मेरे आसुओं को पोछकर, सारे दुःख को दुर किया।